बहष्कृत भरत पत्रक

नयी दिल्ली, चार जुलाई (भाषा) निकोटिन स्वाद वाली ई-सिगरेट सहित इस तरह की अन्य चीजों को ‘‘ड्रग्स’’ की श्रेणी में डालने का केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रस्ताव अटार्नी जनरल के पास उनकी राय जानने के लिए भेजा गया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। सरकार के इस कदम का उद्देश्य इस तरह के उत्पादों के उत्पादन, बिक्री, वितरण और आयात पर प्रतिबंध लगाना है। एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि ई-सिगरेट और ई-निकोटिन स्वाद वाले हुक्के जैसे धूम्रपान के वैकल्पिक साधनों पर प्रतिबंध लगाना मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के प्रथम 100 दिन के एजेंडा की प्राथमिकता में शामिल है। सूत्र ने बताया कि इस प्रस्ताव को ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) से मंजूरी मिल गई है। देश में औषधियों से जुड़े तकनीकी विषयों पर सरकार की यह शीर्ष सलाहकारी संस्था अब अटार्नी जनरल की राय का इंतजार कर रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रस्ताव ई सिगरेट सहित ‘‘इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलिवरी सिस्टम’’ (ईएनडीएस) उपकरणों को ‘‘ड्रग्स् एवं कॉस्मेटिक्स एक्ट’’ के तहत वर्गीकृत करना है। गौरतलब है कि दुनिया भर में ईएनडीएस के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हो रही है। कुछ संगठनों का दावा है कि ये उपकरण धूम्रपान की लत कम करते हैं और परंपरागत सिगरेट की तुलना में कम नुकसानदेह विकल्प हैं, जबकि सरकार इस दलील के साथ इसे प्रतिबंधित करना चाहती है कि ये परंपरागत सिगरेटों की तरह ही स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएसओ) ने प्रस्ताव किया है कि ई-सिगरेट और इस तरह की अन्य चीजों के उत्पादन, बिक्री और वितरण को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट,1940 की धारा 26 ए के तहत निषिद्ध किया जाना चाहिए। साथ ही, इनके आयात पर भी पाबंदी लगाई जानी चाहिए। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने इलेक्ट्रानिक निकोटिन डिलिवरी सिस्टम पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। वहीं, एसोसिएशन ऑफ वेपर्स इंडिया नाम की उपभोक्ता संस्था ने कहा है कि कई देशों से ये साक्ष्य मिले हैं कि ई-सिगरेट की इजाजत देने से धूम्रपान की दर में तेजी से गिरावट दर्ज की गई। गौरतलब है कि इन उपकरणों के 3,000 से अधिक यूजर ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा था। साथ ही, 24 राज्यों से 1,000 से अधिक चिकित्सकों ने इस साल अप्रैल में प्रधानमंत्री से इसके खासतौर पर युवाओं में महामारी का रूप लेने से पहले प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया था। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले साल अगस्त में सभी राज्यों एवं केंद्र शासित क्षेत्रों को एक परामर्श जारी कर इन उत्पादों के उत्पादन, बिक्री और आयात पर प्रतिबंध लगाने को कहा था।