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नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली हाई कोर्ट ने तथाकथित स्वयंभू संत वीरेंद्र देव दीक्षित के रोहिणी के आध्यात्मिक आश्रम व विद्यालय में कथित रूप से 100 से अधिक नाबालिग लड़कियों को अवैध रूप से बंद किए जाने की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ का प्रथम दृष्टया विचार था कि संस्थान का प्रबंधन दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग को कब्जे में लेना चाहिए।

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