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किसी वारदात से यदि कोई संज्ञेय अपराध बनता है तो पुलिस को पहले एफआइआर दर्ज करना चाहिए। इसके बाद ही जांच शुरू होगी। विवेचना के दौरान वीडियो को लैब भेजा जाएगा। वहां उसकी सत्यता की पुष्टि होगी। आपराधिक मामले की जांच मुकदमा दर्ज होने के बाद ही होगी। मुकदमा दर्ज होने से पहले जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है और न ही आवश्यकता है।

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