बेटा-बेटी गुमसुम या चिड़चिड़े हों तो मानसिक जांच जरूरी

जागरणसंवाददाता,बांदा:यदिबेटायाबेटीगुमसुमरहतेहैंऔरउनमेंचिड़चिड़ापनहैतोइसेहलकेमेंनलें,बल्किमानसिकरोगविभागमेंजांचऔरइलाजकराएं।नींदनआनाऔरअकेलेमेंकुछबड़बड़ानाभीमानसिकरोगकासंकेतहै।यहबातेंमुख्यचिकित्साधिकारीडा.अनिलकुमारश्रीवास्तवनेगुरुवारकोजागरुकताकैंपमेंकहीं।

जिलामानसिकस्वास्थ्यकार्यक्रमकीटीमनेशहरकेकाशीरामकालोनीहरदौलीमेंजागरुकताशिविरकाआयोजनकिया।सीएमओडा.अनिलकुमारश्रीवास्तवनेफीताकाटकरउद्घाटनकिया।उन्होंनेइसदौरानकहाकिमानसिकरोगकिसीकोभीकिसीभीअवस्थामेंहोसकताहै।यदिआपकेआसपासपासपड़ोसमेंघरमेंकोईऐसाव्यक्तिहोजोगुमसुमरहताहो,अकेलापनमहसूसकरताहो,नींदनाआतीहो,अपनेआपबातेंकरताहो,भूत-प्रेत,देवीदेवताकासायारहताहोउसेजिलाचिकित्सालयमेंआनेकेलिएप्रेरितकरें।मनोरोगचिकित्सकडा.हरदयालनेमरीजोंकीजांचऔरइलाजकिया।इसदौरानकरीब70लोगोंकीजांचहुई।मरीजोंकीकाउंसिलिगकीगई।अनुश्रवणअधिकारीनरेंद्रकुमारमिश्रानेलोगोंकोअपनीदिनचर्यामेंसंतुलनबनाएरखने,फास्टफूडनखानेएवंयोगकरनेकीसलाहदी।साइकाइट्रिकनर्सनेमरीजोंकोनिश्शुल्कदवावितरितकी।अशोककुमारनेपंपलेटबांटकरलोगोंकोजागरूककिया।शिविरमेंजिलासमन्वयकअधिकारीप्रेमपालएवंआशापुष्पानेसहयोगकिया।