उत्तराखंड का एक ऐसा प्राथमिक विद्यालय, जो राज्य के स्कूलों के लिए बन गया मिसाल!

उत्तराखंडकेसरकारीस्कूलों(UttarakhandGovtSchools)कीहालतकिसीसेछुपीनहींहैलेकिनकहतेहैंनकिअगरसमाजकोबदलनाहै,तोपहलेखुदकोबदलनापड़ताहै.इसीतर्जपरउत्तराखंडमेंशिक्षाकेस्तरकोसुधारनेकाकामकियाहैगुरनाकेआदर्शप्राथमिकविद्यालय(GurnaPrimarySchoolPithoragarh)केप्रधानाचार्यसुभाषजोशीने,जिन्होंनेबंदहोनेकीस्थितिसेस्कूलकोनिकालकरआजअन्यविद्यालयोंऔरशिक्षकोंकेलिएएकमिसालपेशकीहै.उनकेप्रयाससेआजगुरनास्थितप्राइमरीस्कूलपूरेउत्तराखंडमेंबेहतरशिक्षाकेलिएजानाजारहाहै.

गुरनास्थितइसशिक्षाकेमंदिरमेंसुभाषजोशीनेबिनाकिसीविभागीयमददकेऐसीअलखजगाई,जोआजसूबेमेंएकमिसालबनचुकीहै.इसप्राइमरीस्कूलमेंछात्रोंकोमिलनेवालीसुविधाएंकिसीभीदशामेंप्राइवेटस्कूलोंसेकमनहींहैं.

जनपदपिथौरागढ़केगुरनाकाआदर्शप्राथमिकविद्यालय,जोकभीकमछात्रसंख्याकेकारणबंदहोनेकीकगारमेंपहुंचगयाथा,जिसनेआजआदर्शविद्यालयबनउत्तराखंडमेंप्राथमिकशिक्षाकोएकअलगस्तरपरपहुंचाकरअन्यस्कूलोंकोभीआईनादिखानेकाकामकियाहै.यहसबमुमकिनहुआविद्यालयकेप्रधानाचार्यसुभाषजोशीकीदूरगामीसोचऔरमेहनतसे.

साल2015मेंजहांइसविद्यालयमेंमहज13बच्चेपढ़तेथे,आजस्कूलमेंछात्रोंकीसंख्या200तकपहुंचगईहै.स्कूलमेंस्मार्टक्लास,हरकक्षामेंएसी,बच्चोंकोलाने-लेजानेकेलिएबसआदिकीसुविधाएंइसेसूबेकेअन्यप्राथमिकस्कूलोंसेअलगबनातीहैं.

यहउत्तराखंडकापहलाऐसास्कूलहोगा,जहांरविवारकेअलावाअन्यकोईअवकाशनहींहोता.बच्चोंकेलिएरविवारकोभीप्रतियोगीपरीक्षाओंकीक्लासलगाईजातीहै,जिसकापरिणामयहरहाकिइससालपहलीलिस्टसे7बच्चोंकाचयननवोदयविद्यालयमेंहोचुकाहै.स्कूलकेप्रधानाचार्यनेआजतककोईछुट्टीनहींलीहै.बच्चोंकोगुणवत्ताकेसाथशिक्षितकरनेकीपहलकाहीनतीजाहैकिपिछले5सालमेंइसस्कूलके43बच्चोंकानवोदयकेलिएचयनहोचुकाहै.

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