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यही वजह है कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिदर सिंह का न केवल विरोध किया बल्कि पार्टी हाईकमान व पंजाब की जनता के सामने उनकी छवि भी खराब की। इतिहास गवाह है कि अमृतसर के ईस्ट विधानसभा क्षेत्र से नवजोत सिद्धू जब विधायक बनकर निकले तो उन्होंने कभी इस हलके की तरफ मुड़कर नहीं देखा। हलके के लोग वर्षों तक सिद्धू का इंतजार करते रहे। यहां तक कि जौड़ा फाटक रेल हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों व अनाथ हुए बच्चों की पढ़ाई व परवरिश का जिम्मा नवजोत सिंह सिद्धू ने जुबानी तौर पर उठाया था। यहां भी सिद्धू ने अपना वादा पूरा नहीं किया। सिद्धू जिस पार्टी में जाएंगे, उसका बुरा हश्र करेंगे। इसलिए सभी राजनीतिक दलों से निवेदन है कि सिद्धू का बहिष्कार करें। आज पंजाब की जनता एक ऐसा शासक चाहती है जो जनता की आवाज सुने, उनके दुख तकलीफों का समाधान करे, महंगाई पर नियंत्रण कसे। चरणजीत सिंह चन्नी जनता की हर उम्मीद पर खरा उतरेंगे यह मुझे विश्वास है। पार्टी हाईकमान किसी भी सूरत में चलने को सीएम के पद से ना हटाए। हटाना है तो नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी से निकाल दे।