मउंट सड कर्ड मनंग इन हंद

19 अगस्त 1941 को ग्राम बाड़ियूं निवासी गुमान सिंह रावत के घर में जन्मे जसवंत सिंह वर्ष 19 वर्ष की आयु में सेना में भर्ती हुए। 14 सितंबर 1961 को उनकी ट्रेनिंग पूरी हुई और 17 नवंबर 1962 को गढ़वाल राइफल्स की चौथी बटालियन की एक कंपनी को अरुणाचल प्रदेश के नूरानांग ब्रिज पर तैनात कर दिया गया। ब्रिज को अपने कब्जे में लेने के लिए चीनी सेना ने उस पर हमला कर दिया। कई भारतीय जवान हताहत हुए, लेकिन जसवंत सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और नूरानांग पोस्ट पर अकेले ही 72 घंटों तक दुश्मन से जूझते रहे। चीनी सेना ने भी जसवंत सिंह की वीरता का लोहा माना व भारतीय सेना को उनकी एक प्रतिमा बनाकर भेंट की। भारतीय सेना ने भी इस जांबाज की वीरता को सम्मान देते हुए नूरानांग पोस्ट को जसवंत गढ़ का नाम दिया। साथ ही जसवंत सिंह की शहादत के बाद भी उन्हें जीवित मान पदोन्नतियां दी। उन्हें इस अदम्य वीरता के लिए महावीर चक्र भी प्रदान किया गया।

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